12 Rabi ul awwal – Eid miladunnabi ki fazilat


अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह वबरकाताहु माहे 12 rabi ul awwal, eid miladunnabi की बहुत ज्यादा फ़ज़िलतें हैं मै आज ऐसा फ़ज़ीलत लेकर हाज़िर हु जिससे आपकी तमाम अज़ाब परेशानिया मुसीबतें इंशाल्लाह दूर हो जाएंगी

12 Rabi ul awwal Eid Miladunnabi का दिन सबसे पाक दिन माना जाता है इसमें तमाम मुसल्माने घेर को रौशनी करते है अल्लाह की तिलावत करते है|

12 रबी उल अव्वल ईद मिलादुन्नबी का दिन बहुत बरकत वाला दिन है इसकी बहुत फ़ज़िलतें है जो इस महीने में साड़ी क़ायनात आकाश दो जहाँ हज़रात -इ मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने तसरीफ लाये थे रबी

उल अव्वल रहमतो और बरकतो का महीना है सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के आने से दुनिया को रौशनी और हिदायत मिली है वैसे तो सारे महीनो की अपनी फ़ज़िलतें है पर रबी उल अव्वल ईद मिलादुन्नबी के महीने का एक खाश फ़ज़ीलत है जो दूवा मांगे इंशाल्लाह जरूर क़ुबूल होंगी|

12 Rabi ul awwal ki fazilat

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12 Rabi ul awwal -Eid miladunnabi ki wazifa

आज मै आप सभी के खिदमत में 12रबी उल अव्वल ईद मिलादुन्नबी की वज़ीफ़ा लेकर हाज़िर हुवे हैं जिससे आप बारों महीने पढ़ सकते हैं इंशाल्लाह अल्लाह आपकी हर जाइज़ मक़सद में आपको कामियाब मिलेगी आप इस वज़ीफ़े को कभी भी पढ़ सकते है सुबह शाम उठते बैठते ये वज़ीफ़ा है दरूद शरीफ

इस दरूद शरीफ को जब हम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के लिए पढ़ते है तो अल्लाह ताला हमारे लिए ज़न्नत की दरवाज़े खोलदेता है और खैरो बरकत से नवाज़ ता है और चाहे वो माली परिशानी हो या कुछ और अल्लाह सभी परेशानियों से निजात फरमाएगा इस वज़ीफ़े के साथ साथ नमाज़ के पाबन्दी का खाश ख्याल रखे अल्लाह पाक से जैसे गुमान करोगे वैसा ही होगा ये वज़ीफ़ा दरूद शरीफ है अल्लाह ताला फरमाते हैं जो सख्स सल्लाल्लाहों अलैहि वसल्लम पर एक बार दरूद शरीफ पड़ेगा उसपर 10 रहमतें नाज़िम फरमाएंगे और इसका गुनाह भी माफ़ हो जायेगे जो सख्श सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को दरूद भेजेगा तो अल्लाह पाक फरिश्तों पर 70 रहमतें भेजते हैं|

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Eid miladunnabi kyu manaya jata hai 

बारावफात या फिर जिसे ईद मिलादुन्नबी के नाम से भी जाना जाता है इस्लाम धर्म के सबसे बड़ा त्यौहार मे से एक है पुरे जहाँ में मुसलमान के अलग- अलग जाती इस पाक दिन को काफी धूम धाम से मनाया जाता है क्यूंकि इंसान की सच्चाई और जाती का सन्देश देने वाले पैगम्बर हज़रात मुहम्मद साहब का जनम इसी दिन हुवा था और इसी तारीख को उनका इंतेक़ाल होगये थे |

इसके साथ ही इस दिन को ईद मिलादुन्नबी के नाम से जाना जाता है जिसका मतलब होता है मुहम्मद के जनम का दिन क्यूंकि मोहम्मद साहब का जनम इसी दिन हुवा था ये वजह है सिया जैसे मुसलमान जाती इस दिन को उत्सव के रूम में भी मनाया जाता है ”

बारा का मतलब होता है बारह और वफ़ात का मतलब होता है इंतेक़ाल ”क्यूंकि सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम 12 दिनों तक बीमाफ के वजह से इस दिन इंतेक़ाल होगये थे इसीलिए इस दिन को बारहवफात के रूप में मनाया जाता है यही वजह है की मुसलमान में बारहवफात इतनी धूम धाम से मनाया जाता है|

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मुहम्मद स अ से जुडी कुछ बातें

हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दुनिया में आने से पहले उनके वालिद का इन्तेकाल हो गया था उनके वालिद का नाम इब्न अब्दुल मुत्तलिब था जब वो 6 साल के थे तो उनके वालदा का भी इन्तेकाल हो गया था उनके वालदा का नाम बीबी आमिना था

आप SAW अपने चाचा अबू तालिब और दादा अबू मतालिब के साथ रहने लगे हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की निकाह 25 साल की उम्र में एक बेवा से हुआ जिनका  नाम खदीजा बिन्त खवालिद था |

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को नबूवत 40 साल 6 महीने 10 दिन पीर की रात 21 रमजान को नबूवत की ताज पोषी की गयी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सबसे बड़े और आखिरी दुनियां में आने वाले नबी है इनके बाद कयामत तक कोई पैगम्बर दुनिया में कोई आएंगे इन्ही के ऊपर कुरान भी नाजिल हुआ |

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