Qaza Namaz Padhne Ka Tarika Hindi Mein

0
208

Qaza Namaz Ka Tarika

qaza Namaz Padhne Ka Tarika Hindi Mein – क़ज़ा नमाज़ों को पढ़ने का तरीका हिंदी

qaza namaz padhne ka tarika – जिस की कोई नमाज़ छूट गयी हो तो जब याद आये तो तुरंत उसकी क़ज़ा पढ़ें बिला किसी मज़बूरी के क़ज़ा पढ़ने में देर लगाना गुनाह है तो किसी की कोई नमाज़ क़ज़ा हो गई और उसने तुरंत उसकी क़ज़ा न पढ़ी दूसरे वक़्त पर दूसरे दिन पर टाल दिया की फलाने दिन पढ़ लूंगा या लुंगी

और उस दिन से पहले ही अचानक उसकी मौत हो गई तो उसे दोहरा गुनाह हुआ एक तो नमाज़ क़ज़ा हो जाने का और दूसरा तुरंत क़ज़ा नमाज़ न  ( qaza Namaz ) पढ़ने का होगा |

ये भी पढ़ें :- नियत करने का तरीका और बयान 

ये भी पढ़ें :- जनाज़े की नमाज़ का तरीका

अगर किसी की नमाज़ नाज़ा हो गई तो जहाँ तक हो सके जल्दी से सब की क़ज़ा पढ़ लें हो सके तो हिम्मत कर के एक ही वक़्त में सबकी क़ज़ा पढ़ लें |

यह जरुरी नहीं है की जुहर की क़ज़ा जुहर के वक़्त ही पढ़े और असर की क़ज़ा असर के वक़्त ही पढ़ें और भी कई नमाज़ जो महीने या उससे भी पहले की क़ज़ा है तो उसे भी पढ़ने में देरी न करें एक एक वक़्त में दो दो चार चार रकअत की क़ज़ा पढ़ लिया करें|

Qaza Namaz Padhne Ka Koi Waqt mukarrar Nahi Hai

क़ज़ा नमाज़ पढ़ने का कोई किसी तरह का वक़्त मुक़र्रर नहीं किया गया है आपको जिस वक़्त मुहलत मिले वजू बना कर पढ़ लें हाँ बस आप इतना ध्यान रखें की मकरूह वक़्त न हो|

अगर किसी की एक ही नमाज़ क़ज़ा हुइ हो और उससे पहले कोई नमाज़ उसकी क़ज़ा नहीं हुइ या इससे पहले क़ज़ा तो हुइ लेकिन सब की क़ज़ा पढ़ लिया है सिर्फ इसी एक नमाज़ की क़ज़ा पढ़ना बाकी है तो पहले इसकी क़ज़ा पढ़ लें|

अगर बगैर क़ज़ा पढ़े हुवे अदा नमाज़ पढ़ी तो अदा दुरुस्त नहीं हुइ कज़ा नमाज़ पढ़ कर फिर अदा पढ़ें हाँ अगर क़ज़ा पढ़ना बिलकुल भी याद नहीं रहा तो अदा दुरुस्त हो गई अब जब आपको याद आये सिर्फ क़ज़ा नमाज़ पढ़ें अदा को न दोहराएं|

हाँ अगर वक़्त की बहुत तंगी है आपको लगे की अगर क़ज़ा नमाज़ पहले पढ़ेंगे तो अदा नमाज़ का वक़्त नहीं बचेगा तो इस सूरत में पहले अदा नमाज़ पढ़लें उसके बाद क़ज़ा नमाज़ ( qaza namaz ) पढ़ें ये भी दुरुस्त है|

क़ज़ा नमाज़ ( qaza namaz ) पढ़ने का ब्यान हिंदी

अगर दो या तीन या चार या पांच नमाज़ें कस्जस हो गयी और सिवाए इन नमाज़ों के उसके जिम्मे किसी और नमाज़ की क़ज़ा बाकी नहीं है यानी ये की उम्र भर में जब से जवान हुवे है कभी कोई नमाज़ क़ज़ा न हुइ या क़ज़ा तो हो गयी लेकिन सबकी क़ज़ा पढ़ चुके है तो जब तक इन पांचो की क़ज़ा न पढ़ लें तब तक अदा नमाज़ पढ़ना दुरुस्त नहीं है|

Click here – Fazar Namaz ka tarika 

Click here – Zohar Namaz ka tarika 

और जब इन पांचो नमाज़ की क़ज़ा पढ़ें तो इस तरह पढ़ें की जो नमाज़ सबसे अव्वल क़ज़ा हुइ है उसकी क़ज़ा पढ़ें फिर उसके बाद वाली फिर उसके बाद वाली फिर उसके बाद वाली इसी तरह तरतीब से पांचो की क़ज़ा नमाज़ ( qaza namaz ) पढ़ें|

जैसे किसी ने पुरे एक दिन की नमाज़ नहीं पढ़ी फज़र जहर असर मग़रिब ईशा ये पांचो नमाज़ें छूट गयी तो पहले फज़र फिर जोहर फिर असर फिर मग़रिब फिर ईशा इसी तरतीब से क़ज़ा नमाज़ पढ़ें अगर पहले फज़र की क़ज़ा नहीं पढ़ी बल्कि जोहर की पढ़ी या असर की पढ़ी या फिर कोई और पढ़ी तो ये दुरुस्त नहीं है आपको फिर से पढ़ना पड़ेगा|

क़ज़ा नमाज़ ( qaza namaz ) पढ़ने के मशलें

अगर किसी की छ: नमाज़ें क़ज़ा हो गयी है तो अब उनकी क़ज़ा पढ़ें बगैर पढ़े भी अदा नमाज़ पढ़ना जायज है और जब इन छ: नमाज़ों की क़ज़ा पढ़ें तो जो नमाज़ सबसे अव्वल क़ज़ा हुइ है उसकी क़ज़ा पढ़ना वाजिब नहीं है बल्कि जो चाहे पहले पढ़ें या पीछे पढ़ें सब जायज है और अब तरतीब से पढ़ना वाजिब नहीं है|

दो चार महीने या दो चार साल हुवे की किसी की छ: नमाज़ें या ज्यादा क़ज़ा हो गयी थी और अब तक उसकी क़ज़ा नहीं पढ़ी लेकिन उसके बाद से हमेशा नमाज़ पढ़ते रहे हैं कभी क़ज़ा नहीं होने पाई मुद्दत के बाद फिर एक नमाज़ जाती रही तो इस शक्ल में भी बगैर उसकी क़ज़ा पढ़ें हुवे अदा नमाज़ पढ़ना दुरुस्त है और तर्तीब वाजिब है|

Click here – Maghrib Namaz Ka Tarika

Click here – Isha Namaz Ka Tarika 

अगर आपको ये इनफार्मेशन अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें हो सकता है आपके वजह से किसी की नमाज़ दुरुस्त हो जाएँ अल्लाह हाफ़िज़

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here