Niyat Karne Ka Tarika or Byan In Hindi | नमाज़ की शर्तों का बयान

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नियत करने का ब्यान

Niyat Karne Ka Tarika or Byan In Hindi – नमाज़ की शर्तों का मुकम्मल ब्यान हिंदी में 

Niyat Karne Ka Tarika or Byan In Hindiनमाज़ सुरु करने से पहले कई चीजें वाजिब है जैसे अगर वज़ू न होते वज़ू करें अगर आप पाक साफ़ न हो तो ग़ुस्ल करें बदन या फिर कपडे पर कोई नजासत लगी हो तो उसको पाक करें जिस जगह पर आपको पढ़नी है उस जगह को भी पाक ओ साफ़ होनी चाहिए|

सिर्फ और दोनों हथेली और दोनों पैरके सिवा सर से पैर तक सारा बदन खूब ढका हुआ होना चाहिए क़िब्ले की तरफ मुंह कर के आप जिस नमाज़ (namaz) को पढ़ना चाहतें उसकी नियत यानी दिल में इरादा करें वक़्त होने पर ही नमाज़ को अदा करें|

Niyat Karne ka tarika or byan – नियत करने का ब्यान हिंदी 

नाजरीन जुबान से बोल कर नियत( niyat )करना जरुरी नहीं है बल्कि दिल में बस आपने अपने दिल में बीएस इतना सोच लिया की मैं आज जुहर की फर्ज नमाज़ पढता हूँ या पढ़ती हूँ अगर आप सुन्नत पढ़ने जा रहे है तो सिर्फ यह दिल में इरादा कर लें की मैं आज की जुहर की सुन्नत पढता हूँ या पढ़ती हूँ बस इतना ही इरादा करके हाँथ बाँध लें तो आपकी नमाज़ हो जायेगी|

अगर कोई जबान से नियत ( niyat ) करना चाहता है तो बस इतना कह देना काफी है नियत करता हूँ या करती हूँ मैं आज जुहर के फर्ज की अल्लाहु अकबर या फिर नियत करता हूँ मैं या करती हूँ मैं जुहर की सुन्नतों की अल्लाहु अकबर और चार रकअत नमाज़ ए जुहर मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अगर ये सब नहीं भी कहते है तो ऊपर बताये गए तरीकों से बस इरादा कर लिया तो आपकी नियत ( niyat ) हो जायेगी|

ये सब चीजें नमाज़ के लिए शर्तें हैं अगर इनमे से एक चीज भी छूट गयी तो नमाज़ न होगी बारीक तंजेब या बक या जाली वगैरह का बड़ा जाली दार बारीक दुपट्टा ओढ़ कर नमाज़ पढ़ना दुरुस्त नहीं है|

Namaz Padhne ke kuch mashlein

अगर नमाज़ (namaz) पढ़ते वक़्त चौथाई पिंडली या चौथाई राण या चौथाई बांह खुल जाए और इतनी देर तक खुली रहे जितनी देर में तीन बार सुब्हानल्लाह कह सके तो आपकी नमाज़ जाती रही आपकी नमाज़ न होगी आप नमाज़ दुबारा पढ़ें और अगर ज्यादा देर तक नहीं खुला रहा तो बल्कि की खुलते ही धक् लिया है आपकी नमाज़ हो गयी इसी तरह बदन को ढांकना वाजिब है|

उसमे से जब चौथाई हिस्सा खुल जायेगा तो आपकी नमाज़ न होगी जैसे एक कान का चौथाई या चौथाई सर चौथाई बाल या चौथाई पेट या चौथाई पीठ या चौथाई गर्दन या चौथाई सीना या चौथाई छाती वगैरह खुल जाने से नमाज़ नहीं होगी|

जो लड़की अभी जवान नहीं हुइ है और उसकी ओढ़नी नमाज़ पढ़ते वक़्त उसके सर से सरक गई और तो उसकी नमाज़ हो जायेगी|

अगर कपडे या बदन पर कुछ नजासत लगी हो लेकिन उसे साफ़ करने के लिए पानी कही नहीं मिलता है और नमाज़ का वक़्त हो गया है तो उसी तरह नमाज़ पढ़लें आपकी नमाज़ ह जाएगी|

कब नजिस में भी नमाज़ पढ़ना दुरुस्त है|

अगर सारा कपडा नजिस हो या पूरा कपडा तो नजिस नहीं लेकिन बहुत ही कम पाक है यानी की एक चौथाई से कम पाक है और बाकी सबके सब नजिस है तो ऐसे वक़्त यह भी दुरुस्त है की उस कपडे को पहन कर ही नमाज़ पढ़ें ये दुरुस्त मन गया है

और दूसरा उस वक़्त बिना कपडे पहने भी नमाज़ (namaz) पढ़ सकते है लेकिन बिना कपडे पहने नमाज़ पढ़ने से अच्छा है की नजिस कपडे को पहन कर ही नमाज़ पढ़ लें बिना कपडे पहने नमाज़ पढ़ने सेबेहतर है नजिस कपडे को पहन कर नमाज़ पढ़लें ये ज्यादा बेहतर होगा|

और अगर चौथाई कपडा या चौथाई से ज्यादा पाक हो तो बिना कपडे पहने नमाज़ पढ़ना दुरुस्त नहीं है उसी नजिस कपडे को पहन कर पढ़ना वाजिब है|

अगर आप किसी लम्बे सफर के लिए निकल गए है और आपके पास थोड़ा सा पानी है की अगर आप उस पानी से नजासत को धोते है यानी पाक करते है तो वज़ू करने के लिए पानी कम पड़ जाएगा और अगर वज़ू करते है तो नजासत धोने के लिए पानी नहीं बचेगा तो उस पानी से पहले नजासत धो लें उसके बाद वज़ू के लिए तयम्मुम करें|

नमाज़ पढ़ने के बाद वक़्त का पता चलना

अगर आपने जहर की नमाज़ मुकम्मल कर ली लेकिन आपको पढ़ने के बाद मालुम हुआ की जिस वक़्त आपने नमाज़ पढ़ी उस वक़्त जहर की नमाज़ का वक़्त था ही नहीं बल्कि असर की नमाज़ का वक़्त आ गया था तो फिर आपको क़ज़ा पढ़ना वाजिब नहीं है

बल्कि अब वही नमाज़ जो आपने पढ़ी है वो नमाज़ क़ज़ा में आ जाएगा और आप ऐसा समझे गोया अपने क़ज़ा नमाज़ पढ़ी हो अगर आपने नमाज़ का वक़्त होने से पहले नमाज़ को पढ़ लिया तो नमाज़ नहीं होगी|

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