Home Islamic Malumaat Mayyat Ko Kafan Pahnane Ka Tarika (2021)

Mayyat Ko Kafan Pahnane Ka Tarika (2021)

Mayyat Ko Kafan Pahnane ka tarika

Mayyat Ko Kafan Pahnane Ka Tarika – मय्यत को कफ़नाने का मुकम्मल तरीका हिंदी में

अस्सलामो अलैकुम नाजरीन आज के पोस्ट में हम बताएँगे के अगर किसी का इंतेक़ाल हो जाए तो मय्यत mayyat को कफ़न कैसे पहनाएं इसके बारे में हम पूरी जानकारी बताने वाले है जो हर मुसलमान को जानना बहुत जरुरी है|

नाजरीन मौत एक ऐसी चीज है जिसका मजा हर किसी को एक दिन न एक दिन चखना है मौत से कोई भी मुंह नहीं फेर सकता है क्यू की ये हमारे इख़्तेयार में नहीं है पर जो हमारे इख़्तेयार में है वो तो हम कर सकते है|

मय्यत (mayyat) को कफ़नाने का मुकम्मल तरीका हिंदी

औरत को पांच कपड़ों में कफनाना दुरुस्त है (1) पहला कुर्ता (2) दूसरा इज़ार (3) तीसरा सिर बंद (4) चौथा चादर (5) पांचवा सीना बंद

इज़ार सिर से लेकर पाओं तक होना जरुरी है और चादर को उससे एक हाँथ ज्यादा बड़ा रखें और कुर्ता गले से लेकर पाव तक होना चाहिए लेकिन उसमे कली न हो और न आस्तीन हो और सिर बंद तीन हाँथ लम्बा रखें और सीना बंद छातियों से लेकर रानों तक चौड़ा हो और इतना लम्बाई हो की बंद हो जाए|

अगर कोई पांच कपड़ों में न कफनायें बल्कि तीन कपडे कफ़न में दें तो क्या देना चाहिए (1) पहला इज़ार (2) दूसरा चादर (3) तीसरा सिर बंद तो ये भी दुरुस्त है और इतना कफ़न भी काफी है और तीन कपड़ों से कम कफ़न देना मकरूह है और बुरा है हाँ अगर कोई मजबूरी है लाचारी है तो फिर तीन कपड़ों से भी कम देना दुरुस्त है|

सीना बंद चाहियों से लेकर नाफ तक हो तब भी दुरुस्त है लेकिन रानों तक होना ज्यादा बेहतर है अब बात करते है मय्यत (mayyat) को कफ़नाने का तरीका यह है की पहले कफ़न को तीन बार या पांच बार या फिर सात बार लोहबान वगैरह की धुनि दे दें उसके बात मय्यत mayyat को उसमे कफनायें

कफ़नाने का मुकम्मल तरीका

मय्यत (mayyat) को कफ़नाने का तरीका यह है की पहले चादर बिछा लें उसके बाद इज़ार उसके ऊपर कुर्ता फिर उसके ऊपर मय्यत (mayyat) को ले जा कर पहले कुर्ता पहनाएं और मुर्दें के बालों को दो हिस्सा में कर के कुर्ते के ऊपर सीने पर दाल दें

एक हिस्सा दाहिनी तरफ एक हिस्सा बायीं तरफ इसके बाद सिर बंद सिर पर और बालों पर दाल दें उसको न तो बांधो और न लपेटो फिर इज़ार बंद लपेट दो पहले दाहिने तरफ लपेटें उसके बाद बायीं जानिब लपेटें|

इसके बाद सीना बंद बाँध दो फिर चादर लपेट दें पहले दाहिने जानिब फिर बाएं जानिब फिर किसी बज्जी से पैर और सिर की तरफ कफ़न बांध दो और एक बंद से कमर को भी बाँध दें वो इस लिए की रास्ते में कही खुल ना जाए|

सीना बंद को अगर सिर बंद के बाद इज़ार लपेटने से पहले ही बाँध दिया तो तो यह भी जायज है और सब कफनो के ऊपर से बांधे तो वो भी दुरुस्त है |

जब कफ़न हो चूका हो तो मर्द लोग बिना कोई देर किये जनाज़े की नमाज़ पढ़ कर मय्यत ( mayyat ) को दफना दें|

कब्र के अंदर अहदनामा या शजरा रखना कैसा है

कब्र में अहदनामा या अपने पीर का शजरा या और कोई दुआ रखना दुरुस्त नहीं है इसी तरह कफ़न पर या मय्यत (mayyat) के सीने पर काफूर से या रौशनाई से कलमे वगैरह या कोई और दुआ लिखना भी दुरुस्त नहीं है हाँ काबा शरीफ का गिलाफ या अपने पीर का रुमाल वगैरह कोई कपडा बरकत के लिए रख देना दुरुस्त है|

जब बच्चा पैदा होने के कुछ ही देर बाद इंतेक़ाल कर जाए

जो बच्चा जिन्दा पैदा हुआ हो फिर कुछ ही देर में इंतेक़ाल हो गया या फिर पैदा होने के कुछ ही देरबाद ख़तम हो गया तो उसे भी इसी कायदे नहला कर कफ़न पहना कर जनाज़े की नमाज़ पढ़ कर उसको दफना दें और उसका नाम भी कुछ रख दें |

जो बच्चा माँ के पेट से ही मरा हुवा पैदा हो और पैदा होने पर जिंदगी कोई निशानी नहीं पाई गयी उसको भी इसी तरह नहलाओ लेकिन कायदे के मुताबिक उसको कफ़न न दो बल्कि उसको किसी एक कपडे में लपेट कर बिना जनाजे की नमाज़ पढ़े उसको दफ़न करदें और इसका भी कोई न कोई नाम रख दें|

अगर हमल गिर जाए तो इसका मशला ये है की अगर बच्चे के हाँथ पाव मुंह नाक वगैरह त्यार नहीं हुवे हो तो उसे न तो नहलाएं और न कफनायें बल्कि कोई कपडे में लपेट कर एक खडडा खोद कर उसे गाड़ दें|

और अगर उस बच्चे का कोई अंग त्यार हो गया हो तो उसका भी वही हुक्म है जो मुर्दा बच्चा का है यानी ये की उसका भी कोई नाम रखें लेकिन कायदे के मुताबिक कफ़न न दें बल्कि कोई कपडे में लपेट कर दफ़न करदें बिना जनाजे की नमाज़ पढ़ें|

मर्द के कफ़न में कितने कपडे दुरुस्त है

मर्द के कफ़न में अगर दो ही कपडे हो यानी चादर और इज़ार और कुरता न हो तो भी कोई हर्ज नहीं है दो कपडे भी काफी है लेकिन दो कपडे से कम देना मखरूह है हाँ अगर किसी तरह की मजबूरी है तो फिर दुरुस्त है|

अगर कोई किसी शहर में इंतेक़ाल कर जाए उसको वहीँ कफ़न दफ़न करदें उसको दूसरे जगह ले जाना दुरुस्त नहीं है हाँ अगर कोई जगह कोस आधी कोस दूर है जहाँ ले जाना चाहते है तो फिर कोई हर्ज नहीं है|

Watch This video

क्या आपने आज एक अच्छी इल्म हासिल की (Comment) जरूर करें

नाजरीन हमें पूरा उम्मीद है की आज के इस पोस्ट से मय्यत (mayyat) को कफ़न कैसे पहनाएं इस बात का आपको इल्म हो गया होगा तो दोस्तों इस पोस्ट को जितना ज्यादा से ज्यादा से शेयर करें ताकि इस इल्म के बारे औरों को भी मालूमात हो सके अल्लाह हम सब की नेक और जायज दुआओं को कुबूल फरमाएं

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version