Jumma Ki Fazilat In Hindi 2021 – जुम्मा के दिन की ख़ास फ़ज़िलतें हिंदी में

 

Jumma ki fazilat
jumma ke fazail

Jumma Ki Fazilat In Hindi – जुम्मा के दिन की ख़ास फ़ज़िलतें हिंदी में आप सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया आम दिनों के मुकाबले जुम्मा jumma का दिन बहुत अफ़ज़ल है|

तो मेरे प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनो आज हम इन्ही बातो पर रौशनी डालेंगे बस आपको ये करना है की आप हमारे इस article को लास्ट तक पढ़ें इंशा अल्लाह आपको जुम्मा (jumma) की फ़ज़ीलतों के बारे में पूरी मालूमात हो जायेगी तो चलिए सुरु करते है|

नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सं ने फ़रमाया है की तमाम दिनों से बेहतर जुम्मा का दिन है इसी दिन हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पैदा किया गया और जुम्मा jumma के ही दिन उन्हें जन्नत में दाखिल क्या गया और तो और जुम्मा के ही दिन हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को जन्नत से बाहिर निकाले गए और क़यामत भी जुम्मा के दिन ही आएगी – (सहीह मुस्लिम शरीफ)

जुम्मा की रात का दर्जा लैलतुल (कद्र की रात) से भी ज्यादा क्यों है 

इमाम अहमद रहo से नक़ल किया गया है की उन्होंने फ़रमाया है की जुम्मा (jumma) की रात का दर्जा लैलतुल (कद्र की रात) से भी ज्यादा है कुछ वजहों से इसलिए की इसी रात में सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम अपनी माँ के पाक पेट में नुमाया हुए

और आप ल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम का दुनिया में तशरीफ़ लाना दुनिया व आखीरियत की इतनी भलाई और बरकत की वजह हुआ उनके रहमतों को ना तो नापा जा सकता है और ना गिराया जा सकता है| (फ़ारसी शरह मिश्कात) 

आप ल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया की जुम्मा में एक घडी ऐसी है की अगर कोई मुसलमान उस वक़्त अल्लाह तआला से पुरे अक़ीदे से दुआ मांगे तो वो दुआ जरूर क़ुबूल होगी| (बुखारी व मुस्लिम)

लेकिन उलेमा की राय इसमें अलग है की यह घडी जिसका जिक्र हदीस पाक में गुजरा वो किस वक़्त है शेख अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी ने शरह सफरुसआदत में चालीस कौल नक़ल किये है अगर इन सब में दो कौलो को बड़ा माना है एक यह है की वो घडी खुत्बा पढ़ने के वक़्त से नमाज़ के ख़त्म होने तक है|

और दूसरा यह की वह घडी दिन के आखिरी हिस्से में है इस दूसरे कौल को बहुत बड़े गिरोह ने अपनाया है और बजट सी सही हदीसें इसकी ताईद में है शेख देहलवी फरमाते है की जब जब जुम्मा (jumma) का दिन ख़त्म होने लगे तो उनको खबर कर दें ताकि वो उस वक़्त जिक्र और दुआ में लग जाएँ (ashatullamaat)

जुम्मा (jumma) के दिन अपने नबी पर दरूद शरीफ पढ़ा करो

आप ल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया की तुम्हारे सब दिनों में जुम्मा का दिन सबसे ज्यादा अफ़ज़ल है उसी दिन सुर फूंका जायगा इस दिन ज्यादा से ज्यादा मुझपर दरूद शरीफ पढ़ा करो क्यों की ये सारे दरूद जुम्मा के ही दिन मेरे सामने पेस किये जाते है|

सहाबा ने अर्ज किया है की ऐ अल्लाह के रसूल आप पर कैसे पेश किया जाता है हालांकि मरने के बाद आपकी हड्डियां भी न होंगी आप सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने इरशाद फ़रमाया की अल्लाह तआला ने हमेशा के लिए जमीन पर नबियों अलैo का बदन हराम कर दिया है (अबूदाऊद शरीफ) यानी जमीन नबियों अलैहo के बदन को किसी तरह की भी नुकशान नहीं कर सकती जैसा की दुनिया में थे वैसे ही रहेंगे|

आप सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने इरशाद फ़रमाया की शहीद गवाह से मुराद जुम्मा का दिन है कोई दिन जुम्मा से ज्यादा बुजुर्ग नहीं इसमें एक घडी ऐसी है की कोई मुसलमान इसमें दुआ नहीं करता मगर यह की अल्लाह तआला उसे क़ुबूल फरमाता है और किसी चीज से पनाह नहीं मांगता मगर यह की अल्लाह तआला उसे पनाह देता है – (तिरमिजी)

शहीद ला लफ्ज सुरः बरुज में आया है अल्लाह तआला ने उसदिन की कसम खाई है|

वस्समाई जातिल बुरुजि वल यौमिल मौउदी व् शाहिदिव्व मशहूदo

कसम है आसमान की जो बुर्जो वाला है कसम है माउद कयामत के दिन की और कसम है शाहिद जुम्मा की और मशहूद (अरफ़ा) की

आप सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने इरशाद फ़रमाया की जुम्मा का दिन तमाम दिनों का सरदार है और अल्लाह पाक के नजदीक और सबसे बुजुर्ग है और ईदुल फ़ित्र और ईदुल अजहा से भी ज्यादा जुम्मा का दिन अल्लाह तआला के नजदीक है| (इब्ने माजा)

जुम्मा के आदाब जुम्मा (jumma) के फ़ज़ाइल इन हिंदी

हर मुसलमान को चाहिए की जुम्मा jumma का एहतेमाम जुमेरात से करें जुमेरात का दिन असर के बाद इस्तेग़फ़ार वगैरह ज्यादा से ज्यादा करें और जुम्मा के दिन को पहनने वाले कपडे साफ़ सुथरा रखें जुम्मा के दिन अपने जिस्म और कपड़ो पर इत्र वैगरह लगाया करें|

बुजुर्गो ने फ़रमाया है की सबसे ज्यादा जुम्मा का फायदा उसको मिलेगा जो शख्स उसके इंतजार में रहता है और जुम्मा की तैयारियां जुमेरात से ही करता हो और सबसे ज्यादा बद किस्मत वो शख्स होगा जिसको ये भी मालूम न हो की जुम्मा कब है यहाँ तक की वो लोगो से पूछे आज कौनसा दिन है|

जुम्मा के नमाज़ के लिए पैदल जाने में हर कदम पर एक साल रोज़ा रखने का सवाब मिलता है (तिरमिजी शरीफ)

नबी ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम जुम्मा (jumma) के दिन फजर के नमाज़ में सूरह अलिफ़-लाम-मीम सजदा और सूरह हल अता अल्ल इंसानी पढ़ते थे इसी लिए इन सूरतों को जुमा के दिन फजर की नमाज़ में मुस्तहब समझ कर कभी कभी पढ़ा करें और कभी कभी छोड़ भी दें ताके लोगों को वाजिब होने का ख्याल न हों|

मेरे प्यारे नाजरीन आपने आज क्या सीखा

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