Surah Maun in hindi With translation – Duanamaz

Surah maun hindi with translation

Surah maun hindi mein – सूरह माउन हिंदी अरबिक और इंग्लिश में तर्जुमा के साथ 

मेरे प्यारे प्यारे इस्लामी अस्सलामो अलैकुम भाइयों आज के पोस्ट में हम (surah maun) और उसके तर्जुमा के बारे में जिक्र करेंगे आप इस आर्टिकल्स को लास्ट तक जरूर पढ़ें |

सूरह माउन हिंदी और उसकी तफ़्सीर surah maun hindi with translation और tafsser in hindi

हमने इस पोस्ट में सूरह माउन (surah maun) को अरबिक टेक्सट और हिंदी इंग्लिश टेक्सट में लगा दिया है आपको जो लैंग्वेज पसंद हो उसमे पढ़ सकते हो |

सूरह माउन इन अरबिक – surah maun in arabic

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

أَرَءَيْت الّذِىْ يُكَذِّبُ بِالدِّيْنِ فَذٰلِكَ الَّذِىْ
يَدُعُّ الْيَتِيْمَ وَلَا يَحُضُّ عَلٰى طَعَامِ الْمِسْكِيْنِ
فَوَيْلُٗ لِّلْمُصَلِّيْنَ الَّذِيْنَ هُمْ عَنْ صَلَتِهِمْ سَاهُوْنَ
الَّذِيْنَ هُمْ يُرَآءُوْنَ وَيَمْنَعُوْنَ الْمَاعُوْنَ

सूरह माउन हिंदी में – surah maun hini me

(बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम)
 
अराएतल लजी यु कज्जीबू बिद्दिन 
फजालीकल लजी यदु उल-यतीम 
वला या हुद्दु अला ता-अमिल मिसकीन 
फा वाई लुल-लिल मु सल्लीन 
अल लजीना हुम अन सलातीहीम सहून
अल लजीना हुम युरा-उन 
वा यमना वनल मा-उन 
Surah al maun in english – सूरह माउन इंग्लिश में 
(Bismilla-hirrahama-nirraheem)
Araayta allathee yukaththibu biddeen
Fathalika allathee yaduAAAAu alyateem
Wala yahuddu AAala taAAami almiskeen
Fawaylun lilmusalleen
Allatheena hum AAan salatihim sahoon
Allatheena hum yuraoon
WayamnaAAoona almaAAoon
तर्जुमा :-
क्या तुमने उसे देखा जो दीन को झुठलाता है वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता अतः तबाही है उन नमाज़ियों के लिए जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल (असावधान) हैं जो दिखावे के लिए काम करते हैं और साधारण बरतने की चीज़ भी किसी को नहीं देते

सूरह अल माउन की फ़ज़ीलत (surah maun)

अगर कोई शख्स इस सूरह को एकतालीस दफा पढ़ेगा तो खुदा ए ताआला उसकी सारी मुसीबतो को दूर कर देगा और खैरो बरकत में इजाफा होगा इंशा अल्लाह और किसी चीज का मोहताज़ नहीं रहेगा |
अगर इस सूरह को पढ़कर जिस चीज पर दम की जाये तो वह हर तरह महफूज़ रहेगा अँधेरी रात में तीस रात तक रोज एक हजार सौ मर्तबा इस सूरह का पढ़ना और नियत दुसमन के हल्का होने की करना दुसमन जल्द तबाह व बर्बाद हो जायेगा |

Surah al maun ki tafseer – सूरह अल माउन की तफ़्सीर हिंदी में

सूरह माउन surah maun में इस बात का जिक्र किया गया है की आखिरत पर ईमान ना लाने वाले इंसानो यानी काफिरों के जेहन में बहुत सारी बुराइयां पनपती है जैसा की अभी मक्का और मक्के के लोगों का हाल है उन काफिरों को कयामत के आने का एक जरा भी खौफ ना है बस उन्हें अपने दुनियावी ऐसो आराम का फ़िक्र था

इमाम तस्ति रहमतुल्लाह ने हजरत इब्न अब्बास रदियल्लाहु अन्होमा से बयान किया है के हज़रत नाफ़ी बिन अजरीक रहमतुल्लाह ने इन से कहा के मुझे इरशाद बारी ता आला فَذٰلِكَ الَّذِىْ يَدُعُّ الْيَتِيْمَ के बारे बताये तो आप ने फ़रमाया इस का मानी है वह यतीम को इसके हक़ से दूर रखता है पीछे हटा देता है तो हज़रत नाफ़ी ने कहा क्या अरब इस मानी को पहचानते है आप ने फ़रमाया हाँ क्या तू ने हज़रत अबुतालिब को नहीं सुना |

वो कहते है शैयद बिन मंसूर ने हजरत मुहम्मद बिन काब से ब्यान क्या है की يَدُعُّ الْيَتِيْمَ का मानी है वो उसे पीछे हटा देता है अब्दुल रज्जाक इब्ने मंजर और इब्ने अबी हातिम ने हजरत क़तादा रजिo अल्लाहु तआला अन्हा से ये मफ़हूम नक़ल किया है वो यतीम के साथ जुल्म करता है |

मुनाफ़ेक़ीन जो दिखावे के लिए नमाज़ पढ़ते है |

इमाम इब्ने जरीरह इब्ने मंजर इब्ने अबी हातिम इब्ने मरदुया और बिहक्क़ी रहमतुल्लाह ने साब अल ईमान में जिक्र किया है के فَوَيْلُٗ لِّلْمُصَلِّيْنَ الَّذِيْنَ هُمْ عَنْ صَلَتِهِمْ سَاهُوْنَ की तफ़्सीर में हजरत इब्ने अब्बास रजिo अल्लाहु तआला अन्हा ने फ़रमाया वो मुनाफ़ेक़ीन है जो लोगो के दिखावे के लिए अपनी नमाज़े पढ़ते है जब हाजिर हूँ और जब गायब हूँ तो उन्हें तर्क कर देते है और लोगो से बगज रखते हुवे उन्हें उधार कोई से नहीं देते है और यही अल माउन है |

Maun ka kiya matlab hota hai (surah maun)

माउन का मतलब है जो छोटी मामूली चींजों को जो अक्सर लोगों के यहाँ मौजूद नहीं होती जिनको दूसरों से मांग कर अपना काम निकलना होता है जैसे अपने आस पड़ोस से माचिस मांगना नमक तेल मांगना मग जग मांगना हसुली चिलोही मांगना और भी बहुत कुछ वगैरह वगैरह

यतीमों पर जुल्म करना और उनका हक़ छीनना

अगर कोई यतीम अपना हक़ माँगा करता था तो उन्हें वो धक्का मार कर निकाल देते और उनपर जुल्म करते उन्हें इस बात का जरा भी खौफ ना था की ऐसा करना कितना बड़ा गुनाह है वो लोग यतीमों के हको को बिना कोई डर बिना कोई झिझक के मार लिया करते थे |

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