Quran Sharif Padhne ki fazilat | रोज़ाना क़ुरान की तिलावत करें

Quran sharif padhne ki fazilat

रोज़ाना अपने घरों में क़ुरान शरीफ पढ़ने की फ़ज़ीलत हिंदी में

नाजरीन रोज़ाना क़ुरआन शरीफ (quran sharif) की तिलावत क्या करो क्यों की रोज़ाना घरो में कुरान kuran की तिलावत करने से उस घर में अल्लाह तआला की रहमत बरसती है और जिस घर में अल्लाह की रहमतों का बरसात हो जाए उस घर में कुछ भी गलत हो ही नहीं सकता है |

(1) एक हदीस शरीफ में आया है की नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया है की रोज़ाना अपने घरो में क़ुरआन quran sharif की तिलावत करो और अपने घर वालो से भी करवाओ वो इस लिए की यही वो क़ुरान है जो क़यामत के दिन पढ़ने वालों को शफ़ाअत करने के लिए आएगी

(2) दूसरा हदीस क़ुदसी में आया है की अल्लाह तआला फरमाते है जिस शख्स को क़ुरान शरीफ (quran sharif) की तिलावत करने याद करने गौर फिक्र करने और तर्जुमा तकसीर वगैरह करने की मशगुलियत और मशरूफियत ने मेरा जिक्र करने और मुझसे दुआएं मांगना भूल गया

यानि की जिक्र तिलावत में इतना मशगूल रहा की दुआएं मांगने की फुर्शत न मिली तो में उस शख्स को उससे कई गुणा ज्यादा बढ़ कर अता करता हूँ उस शख्स के हर मुरादों को पूरा कर देता हूँ उसके मांगने से ज्यादा में उसको नवाज़ देता हूँ |

और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया है अल्लाह के कलाम को और तमाम कलमों पर ऐसी फ़ज़ीलत और बड़ाई हासिल है जैसी खुद अल्लाह तआला को अपनी तमाम मखलूक पर है |

क़ुरआन शरीफ पढ़ने की फ़ज़ीलत हिंदी में

(3) एक हदीस शरीफ में आया है की नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया है क़ुरान quran sharif सीखो और उसका इल्म हासिल करो और उसको पढ़ो और दुसरो को भी क़ुरान पढ़ने की सलाह दो और अगर किसी को नहीं आता है तो उसे तुम खुद सिखाओ

और पढ़ाओ इस लिए की क़ुरान शरीफ (quran sharif) की मिसाल उस शख्स के बारे में जिसने क़ुरआन सीखा और उसका इल्म हासिल किया फिर उसको पढ़ा और फिर दुसरो को पढ़ाया भी और उस पर अमल भी किया ख़ास कर के तहज्जुद के नमाज़ में पढ़ा

ठीक ऐसे ही जैसे मुश्क से भरी हुयी एक मुंह खुली थैली जिसकी महक हर जगह पर पहुँचती हो और उस शख्स के हक़्क़ में जो हकस क़ुरआन को सीखता है और उसका इल्म भी हासिल करता है मगर रात को गाफिल पड़ा सोता रहता है

न तहज्जुद में क़ुरआन पढता है और ना उसपर अमल करता है हालांकि उसके दिल के अंदर क़ुरआन शरीफ मौजूद है और हिफाजत से भी है ठीक उसी तरह जैसे एक मुश्क से भरी हुइ थैली जिसका जिसका मुंह कास कर बाँध दिया गया हो ।

Quran Sharif (क़ुरआन शरीफ ठीक से पढ़ने का ब्यान)

क़ुरआन करीम को सही सही पढ़ना वाजिब है क़ुरान के हर हरफ़ को ठीक ठीक पढ़ें और जितना हो सकें बुलंद आवाज़ से पढ़ें अगर किसी से कोई हर्फ़ नहीं मिकल पा रहा है तो उसको सही पढ़ने की मश्क करना जरुरी है अगर आप सही पढ़ने की कोशिस नहीं करेंगे तो आप गुनाह के हक़दार होंगे और जब उसका कुरआन ही यही नहीं होगा तो उसकी नमाज़ कहाँ से होगी |

जिस तरह क़ुरान शरीफ quran sharif में सूरतें आगे पीछे लिखी होती है नमाज़ में भी ठीक उसी तरह पढ़ना चाहिए जिस तरह अम्म के सिपारे में लिखी हुवी है उस तरह से ना पढ़ें जब आप पहली रकअत में कोई सुरह पढ़ें तो अब दूसरे रकअत में उसके बाद वाली सुरह पढ़ें उसके पहले वाला सुरह ना पढ़ें |

जब कोई सुरह आप पढ़ना सुरु करदे और बिना जरुरत उस सुरह को बिच में से छोड़ कर दूसरा सुरह सुरु करदे दो वो मकरूह है |

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