Shab-e-jumma ki darood sharif in hindi-

अस्सलामु अलैकुम दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आप के लिए Shab-e-jumma ki darood sharif लेकर आये है इसके बहुत से फ़ज़ीलत है जिससे आप अगर पढ़ेंगे तो आपको आखरी तक सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का ज़ियारत होगा आपको इसलिए आप सभी लोग जरूर Shab-e-jumma ki darood sharif को पढ़े

Shab-e-jumm KI Darood sharif

Shab-e-jumma ki darood sharif

बिस्मिल्लाह हीररहमानिर रहीम

अल्लाहुम्म-सल्ली-वसल्लिम-व-बारीक-अ’ला-सय्यिदिना-मुहम्मदीन-नबिय्यिल-उम्मिय्यिल-ह्-बिबिल-आ’लिल-क़द्रील-अ’ज़िमील-जाहि-व-अ’ला आलिही व-स्ह्-बिहि व-सल्लिम

Shab-e-jumma ki darood sharif

जो सख्स हुजूरे अक़दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वस्सल्लम से सच्ची मोहब्बत रखे तमाम जहान से ज्यादा हुजूर की अजमत अपने दिल में जमाये हुजूर की शान घटाने वालों बद्द मजहबों से बेजार और उन से दूर रहे वो शख्स अगर इस दरूद मकबूल को हर रोज या बरोजे जुमा या बाद नमाज़ फज़र या बाद नमाज़ जूमआ मदीना तैयबा के जानिब यानि क़िबला के जानिब खड़े होकर अगर कोई शख्स ये दरूद शरीफ पढ़े तो इन्शाह अल्लाह बेशुमार सवाब का हकदार होगा

अल्लाह तआला ने फ़रमाया है जो शख्स तहे दिल से इस दरूद शरीफ को एक मर्तबा पढ़ेगा उसे सौ मर्तबा दरूद शरीफ पढ़ने का सवाब मिलेगा और जिसने सौ मर्तबा दरूद पढ़ा गोया दस हजार मर्तबा दरूद पढ़ने का सवाब पाएगा और सबसे बेहतर ये है की बाद नमाज़े जुमाआ के दो चार दस बिस शख्स मिल कर इस दरूदे पाक को पढ़ें

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Shab-e-jumma ki darood sharif ki fazilat

एक बार एक देहाती बूढ़ा यानी बहुत बुज़ुर्गो आदमी ने कहा की जो शख्स हर शबे जुमुआ की दरूद शरीफ यानी जुमेरात और जुमा की रात को इस दुरुद शरीफ को नेक या सच्चे दिल से कम से कम एक मर्तबा पढेगा तो मौत के वक़्त सल्ललाहो अलैहि वसल्लम की ज़ियारत करेगा और जब वह इंसान मरने के बाअद कब्र में दाखिल होते वक़्त भी सल्लल्लाहो आलिहि वसल्लम का ज़ियारत करेगा यहाँ तक की वो देखेगा की सल्ललाहो अलैहि वसल्लम उसे कब्र में अपने रहमत भरे हाथो से उतार रहे है.

 

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Darrod-e-jumma padhne ke fayde

इस दरूद शरीफ पढ़ने वालों पर खुदाए तआला तीन हजार रहमतें नाजिल फरमाएगा उस शख्स पर दो हजार बार खुदाया तआला अपना सलाम भेजेगा पांच हजार नेकियां उस शख्स के नामए आमाल में लिख दिया जायगा पांच हजार गुन्नाह उसके माफ़ कर दिए जाएंगे  उस सख्स के पेशानी यानि माथे पर लिख दिया जायगा की ये दोजख से आजाद है  अल्लाह उसे कयामत के दिन शहीदों के साथ रखेगा  उसके माल में तरक्की और बरकत कर दिया जायगा उसकी औलाद और औलाद की औलाद में बरकत देगा  उसके दुश्मनो को ग़लबा देगा उसके दिलों में हमेशा हमेशा मुहब्बत रखेगा  किसी दिन ख्वाब में बरकतें जियारतें अक़दस से मुशर्रफ होगा ईमान पर ख़ातिमा होगा  कयामत के दिन हुजूर की शफाअत नशीब होगी  अल्लाह तआला उस शख्स से ऐसा राजी होगा की कभी नाराज नहीं होगा

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