Ramzan Ki Fazilat In Hindi | रमज़ान की फ़ज़ीलत इन हिंदी

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Ramzan Ki Fazilat In Hindi रमज़ान की फ़ज़ीलत इन हिंदी Ramzan ki Ahmiyat : अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह वबरकाताहु हजरात आज हम रमजानुल मुबारक की फ़ज़ीलत व अहमियत के बारे में बात करेंगे इस पाक महीने के बारे में जानेंगे ये महीना इस्लामिक महीनो में से सबसे पाक महीना कहा जाता है और इसी महीने में 1400 साल पहले क़ुरआन इ करीम नाजिल हुआ और भी बहुत सारी जानकारी आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे बस आप इस पोस्ट को पूरा मुकम्मल पढ़ें” इस्लाम के इत्तिहास को जानने के लिए इस link पर Click करें दोस्तों आप में से कोई अगर सरकारी जॉब की तैयारी कर रहे है तो उनके Best वेबसाइट है Sarkarijobseva.Com इस वेबसाइट पर आप जरूर जाएँ |

Ramzan ki fazilat

Ramzan Ki Fazilat

बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम

माहे रमजान में नेकियों का अज्र बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता है लिहाज़ा कोशिश कर के ज्‍़यादा से ज्‍़यादा नेकियां इस महीने में जमा कर लेनी चाहियें। चुनान्चे ह़ज़रते सय्यिदुना इब्राहीम नख़्इ़र् फ़रमाते हैं की रमज़ान के महीने में एक दिन का रोज़ा रखना एक हज़ार दिन के रोज़ों से अफ़्ज़ल माना जाता है और रमज़ान के महीने में एक मरतबा तस्बीह़ करना (यानी कहना) इस माह के इ़लावा एक हज़ार मरतबा तस्बीह़ करने (यानी ) कहने से अफ़्ज़ल है और रमज़ान के महीने में एक रक्अ़त पढ़ना गै़रे रमज़ान की एक हज़ार रक्अ़तों से अफ़्ज़ल होता है। (अद्दुर्रुल (Mansur Jild 1 S-faha: 454)

Ramzan Ki Fazilat: रमजान का महत्व अफ़ज़ल हर मोमिन जानता है और माहे रमजान की फ़ज़ीलत क्या है ये भी सब जानते है रमज़ान में जि़क्र की फ़ज़ीलत:अमीरुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते सय्यिदुना उ़मर फ़ारूक़े आ’ज़म रजि से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरम  फरमाते हैं: (तर्जमा) “रमज़ान में जि़क्रुल्लाह करने वाले को बख़्श दिया जाता है और इस रमजान के महीने में अल्लाह बारक़ व तआला से मांगने वाला कभी भी मह़रूम नहीं रहता।”

जो बहुत खुसनसीब मोमिन होता है जो माहे रमज़ान में इन्तिक़ाल करता है उस मोमिन को सुवालाते क़ब्र से निजात  मिल जाता है और अ़ज़ाबे क़ब्र से बच जाता है और जन्नत का ह़क़दार क़रार दिया जाता है। चुनान्चे ह़ज़राते मुह़द्दिस़ीने किराम का फरमान है, “जो मो’मिन इस महीने में मरता है इन्तेकाल करता है उसे सीधे बिना कोई सवालात के जन्नत में भेज दिया जाता है, उस मोमिन के लिये दोज़ख़ का दरवाज़ा बन्द कर दिया जाता है।

Ramzan ki fazilat

माहे रमजान का पाक महीना

रमजानुल मुबारक की रात और दिन, हर लम्हा और पूरा महीना खुसूसियात का है। मगर इसमे खास यहभी है कि इसी पाक महीने में कुरआन शरीफ नाजिल हुआ। कुरआन शरीफ लौहे महफूज से आसमान दुनिया की तरफ इसका नुजूल रमजान की 27 तारीख में हुआ। रमजान की पहली तारीख को हजरत सैयदना शेख अब्दुल कादिर जिलानी की विलादत हुई। रमजान की तीसरी तारीख को नबी करीम (S.A.W) की लख्ते जिगर हजरत फातिमा (रजि0) का विसाल हुआ।

माहे रमज़ान की 6 तारीख को तौरात शरीफ नाजिल हुआ। रमजान की दस तारीख को हजरत खदीजा अल कुबरा (रजि0) का विसाल हुआ। रमजान की 17 तारीख को इस्लाम की पहली जंगे अजीम बदर के मकाम पर लड़ी गई और इसी तारीख को इंजील शरीफ भी नाजिल हुआ । 18 रमजानुल मुबारक को जुबूर नाजिल हुआ। इसी महीने की 21 तारीख को सैयदना अली मुर्तजा शहादत के मंसब से सरफराज हुए।

कायनाते आलम का इस रौशन हकीकत से कौन इंकार कर सकता है कि इंसान को अल्लाह तआला ने अशरफुल मखलूकात बनाया और इसके लिए ऐश व आराम, फरहत बख्श हवाएं और जिंदगी गुजारने के हजारों असबाब व वसायल महज अल्लाह तआला का अपने बंदो पर बहुत एहसाने अजीम है। इस्लाम मजहब हिदायत देता है कि अगर तुम सरमायादार हो या आप मालदार है तो दूसरे लाचार गरीब मुसलमान भाइयों का उसमें हक जानकर उसको अदा करो ताकि अल्लाह तआला की आपको खुशनूदी हासिल हो। अल्लाह तआला का इरशाद है-‘‘ तुम हरगिज भलाई को न पहुंचोगे जब तक राहे खुदा में अपनी सबसे प्यारी चीज खर्च न करो

रमज़ानुल मुबारक की फ़ज़ीलत व बरकत

इसी तरह खालिके कायनात ने माहे रमजान में रोजा रखने का हुक्म दिया ताकि हर मोमिन को गरीबी और तंगदस्ती में मुब्तला और भूक-प्यास से बिलकते इंसानों के दर्द व गम का एहसास हो जाए, दिल व दिमाग में जरूरतमंद मुसलामनों की किफालत का जज्बा-ए-सादिक पैदा हो जाए और खुसूसी तौर पर मुसलमान रमजान की इबादत की बदौलत अपने आप को पहले से ज्यादा अल्लाह तआला के करीब महसूस करता है। गरज कि महीने भर की इस मश्क का मकसदे खास भी यही है कि मुसलमान साल भर के बाकी ग्यारह महीने भी अल्लाह तआला से डरते हुए जिंदगी गुजारे, जिक्र व फिक्र, इबादत व रियाजत, कुरआन की तिलावत और यादे इलाही में खुद को लगा दे|

Ibadat ka mahina mahe ramadan

Ramzan Ki Fazilat: रमजान एक ऐसा महीना है जिसमें हर दिन और हर वक्त इबादत होती है। रोजा इबादत इफ्तार इबादत इफ्तार के बाद तरावीह का इंतजार करना इबादत, तरावीह पढ़कर सहरी के इंतजार में सोना इबादत गरज कि हर पल खुदा की शान नजर आती है। कुरआन शरीफ में सिर्फ रमजान शरीफ ही का नाम लेकर इसकी फजीलत को बयान किया गया है रमज़ान के अलावा और किसी महीना को इतनी नेमत नहीं बख्सा गया है।

इसमें एक रात शबे कद्र है जो हजार महीनों से बेहतर है। रमजान में इब्लीस और दूसरे शैतानों को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है (जो लोग इसके बावजूद भी जो गुनाह करते हैं वह नफ्से अमारा की वजह से करते हैं) (बुखारी) रमजान में नफिल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब 70 गुना मिलता है। रमजानुल मुबारक में सहरी और इफ्तार के समय (Time) दुआ कुबूल होती है।

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