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History of islam in Hindi | जानिए इस्लाम का इत्तिहास हिंदी में

History of islam जानिए इस्लाम का इत्तिहास हिंदी में History of islam in Hindi : अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह वबरकाताहु दोस्तों हम्मे से कई ऐसे भी लोग है जो की इस्लाम के इत्तिहास को नहीं जानते है तो इसी लिए हमने आज कुछ इस्लाम के इत्तिहास के बारे में जानकारी लेकर आये है इसमें वो तमाम जानकारी दी गयी है जो इस्लाम के इत्तिहास से जुडी हुवी है हजरात आज के Post में हम ये भी बताएँगे की हमारे प्यारे नबी हुजूर (S.A.W) इस दुनिया में कब और कहाँ आये और वो दुनिया से कब रुखसत किये और इस्लाम का पाक किताब क़ुरआन कब नाजिल हुवा ये सब जानकारी आपको इस पोस्ट में मिलेगा और ऐसी तमाम जानकारी के लिए गूगल पर हमेशा Duanamaz.com ही सर्च करें |

History of islam

 

History of islam in Hindi

बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम

‘ला-इलाहा इललल्लाह, मुहम्मदुर्रसूलल्लाह’
भावार्थ : अल्लाह सिर्फ एक हैं, उसके सिवाय कोई माबूद नहीं। हजरत मोहम्मद सल्ल. उसके सच्चे पैगंबर हैं।
अल्लाह के हुक्म से हजरत मुहम्मद (S.A.W) ही इस्लाम धर्म को लोगों तक पहुँचाया है। आप हजरत (S.A.W) इस्लाम के आखिरी नबी हैं, आप के बाद अब कायामत तक कोई नबी नहीं आने वाला।
इस्लाम के आने से पहले अरब में कबिलाई संस्कृति का जाहिलाना दौर था। हर कबीले का अपना अलग धर्म था और उनके देवी-देवता भी अलग ही थे। कोई मूर्ति पूजक था तो कोई आग को पूजता था। यहुदियों और ईसाईयों के भी कबीले थे, लेकिन वे भी मजहब के बिगाड़ का शिकार थे। ईश्वर (अल्लाह) को छोड़कर लोग व्यक्ति और प्रकृति पूजा में लगे थे।
इस सबके अलावा भी पूरे अरब में हिंसा का बोलबाला था। औरतें और बच्चे महफूज नहीं थे। लोगों की जान-माल की सुरक्षा की कोई ग्यारंटी नहीं थी। सभी ओर बदइंतजामी थी। इस अंधेरे दौर से दुनिया को बाहर निकालने के लिए अल्लाह तआला ने इस्लाम को लोगों तक पहुँचाने के लिए हजरत मोहम्मद (S.A.W) को पैगंबर बनाकर दुनिया में भेजा।
जन्म Date of birth : कुछ जानकारों के मुताबिक इस्लाम के संस्थापक प्यारे नबी हजरत मोहम्मद (S.A.W) का जन्मदिन हिजरी रबीउल अव्वल महीने month की 2 तारीख को मनाया जाता है। 571 ईसवी को शहर मक्का में हजरत मुहम्मद (S.A.W) का जन्म हुआ था। मक्का सऊदी अरब में है।
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इस्लाम धर्म का इत्तिहास हिंदी में

आप (S.A.W) के वालिद साहब (पिता) का नाम अब्दुल्ला बिन अब्दुल्ल मुतलिब था और वालिदा (माता) का नाम आमना था। सल्ल. के पिता का इंतकाल उनके जन्म के दो माह बाद ही हो गया था। ऐसे में उनका लालन-पालन उनके चाचा अबू तालिब ने किया। आपके चाचा अबू तालिब ने आपका खयाल उनकी जान से भी ज्यादा रखा।
इबादत और इलहाम : आप सल्ल. बचपन से ही अल्लाह तआला की इबादत में लगे रहते थे। आपने कई दिनों तक मक्का की एक पहाड़ी ‘अबुलुन नूर’ पर इबादत की। चालीस वर्ष की उम्र में आपको अल्लाह तआला के तरफ से संदेश (इलहाम) प्राप्त हुआ।
अल्लाह तआला ने फरमाया, ये पूरी दुनिया सूर्य, चाँद, सितारे मैंने पैदा किए हैं। मुझे हमेशा याद करो। मैं सिर्फ और सिर्फ एक हूँ। मेरा कोई मानी-सानी नहीं। लोगों को समझाओ। हजरत मोहम्मद (S.A.W) ने ऐसा करने का अल्लाह तआला को वचन दिया, तभी से उन्हें नुबुवत प्राप्त हुई।

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कुरआन : हजरत मोहम्मद (S.A.W) पर जो अल्लाह तआला की पाक किताब उतारी गई है, वह है- कुरआन। अल्लाह तआला ने फरिश्तों के सरदार जिब्राइल अलै. के मार्फत पाक संदेश (वही) सुनाया। उस संदेश को ही कुरआन में संग्रहित किया गया हैं। कुरआन को नाजिल हुए लगभग 14 सौ साल हो गए लेकिन इस संदेश में जरा भी रद्दोबदल नहीं है।
सबसे पहले ईमान : नबूवत मिलने के बाद हजरत मुहम्मद (S.A.W)ने लोगों को ईमान की दावत दी। मर्दों में सबसे पहले ईमान लाने वाले सहाबी हजरत अबूबक्र सिद्दीक रजि. रहे। बच्चों में हजरत अली रजि. सबसे पहले ईमान लाए और औरतों में सबसे पहले ईमान हजरत खदीजा रजि. ईमान लाईं।
वफात : 632 ईस्वीं, 28 सफर हिजरी सन 11 को 63 वर्ष की उम्र में हमारे प्यारे नबी हजरत मुहम्मद (S.A.W) ने मदीना शरीफ में दुनिया से पर्दा कर लिया। उनके वफात के बाद तक लगभग पूरा अरब इस्लाम के सूत्र में बँध चुका था और आज पूरा दुनिया में उनके बताए गए तरीके पर जिंदगी गुजारने वाले लोग हैं।
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आपलोगो को इस islamic इत्तिहास के बारे में जानकर कैसा लगा ये हमें जरूर comment कर के बताये और इस जानकारी को दुसरो को भी शेयर जरूर करें अल्लाह तआला हमें और आपको सभी मुसीबतों से हिफाजत फरमाए आमीन (अल्लाह हाफ़िज़)

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