Maa baap ke huqooq in hindi | माँ बाप के हुक़ूक़ हिंदी में

Maa Baap ke huqooq

Maa baap ke huqooq in hindi :  अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह वबरकाताहु Maa baap ke huqooq माँ बाप के हुक़ूक़ माँ बाप के हुक़ूक़ दुनियां में सबसे ज्यादा अहम् है और लोगो के तमाम हुक़ूक़ पर अव्वलित और फजीलत रखते है|

Duanamaz.com website पर दुआ, नमाज़, सूरह, वगैरह और भी बहुत कुछ पढ़ने को मिल जायगा आप गूगल पर हमारे वेब को सर्च करें आज हम आपलोगो के लिए माँ बाप के हुक़ूक़ के कुछ जानकारी लेकर आए है हिंदी के सरल भाषा में जिसे हर मुसलमान को जानना चाहिए तो चलिए हम आपलोगो को माँ बाप के हुक़ूक़ के बारे में तफ्सील से बताते हैं|

Maa Baap ke huqooq

 

Maa baap ke huqooq in hindi 

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम

माँ बाप के हुक़ूक़ दुनियां में सबसे ज्यादा अहम् है और लोगो के तमाम हुक़ूक़ पर अव्वलित और फजीलत रखते है हमारे नबी करीम आप सल्ललाहु अलैहे व सल्ल्म ने फ़रमाया है माँ बाप का हक़ अदा करना रोजा नमाज़ हज और जकात सबसे ज्यादा है और जिसको उसके वालिद ने आक कर दिया हो तो वो कभी जन्नत में नहीं जा सकता है|

अगर माँ बाप के नाम पर अप्प सदका करता है तो उसको भी उतना ही सवाब मिलता है जितना की माँ बाप को सवाब मिलता है

सख्स ने सवाल किया मेरे वालिद वाल्दैन का इंतेक़ाल हो गया है यानि देहांत उनके हुक़ूक़ किस तरह अदा करूँ आप सल्लएकलाहु अलैहे व सल्ल्म ने फ़रमाया उनके लिए नमाज़ पढ़ो उनके लिए नमाज़ पढ़ो और दुआ करो और जो वो वसीयत कर गए है उनपर अमल करो उनके दोस्तों और रिस्तेदारो का इज्जत करो और उनके साथ नरमी से पेश आओ और आप सल्ललाहु अलैहे व सल्ल्म ने फ़रमाया बाप के मुक़ाबले माँ का हक़ दो गुना होता है|

आप सल्ललाहु अलैहे व सल्ल्म ने फ़रमाया अपने माँ बाप के साथ नेकी करो ताकि तम्हारी औलाद भी तम्हारे साथ नेकी से पेश आएं| (अल अद्बुल मुफरद)

अल्लाह ने तीन लोगो पर जन्नत को हराम कर दिया उनमे से एक वो जो अपने माँ बाप का नाफरमान है| (अल अद्बुल मुफरद)आप सल्ललाहु अलैहे व सल्ल्म ने फ़रमाया की अपने माँ बाप कुश रखने में माँ बाप के रजा है | और माँ बाप के गुस्से में अल्लाह का गजब पोशीदा है| ( अल अ दबूल मुफ रद )

Maa baap ke huqooq

 

माँ बाप के हुक़ूक़ इन हिंदी

हर गुना के बदले में अजाब और हर जुरम की पकड़ को पीछे किया जा सकता है, लकिन माँ – बाप की नाफरमानी का गुना इतना सख्त होगा की उसकी सजा मरने से पहले भी मिल जाती है| (अल अद्बुल मुफरद)

जो आदमी अपने माँ – बाप की इन्तेकाल के बाद खून का कर्ज अदा कर देता है, और उनके माने हुआ बात पुरे कर देता है , वे अंग्रेजी जिंदगी में उनका नाफरमान रहा हो, फिर भी वह अल्लाह के नजदीक उनका फर्माबरदार समजा जाएगा और जो आदमी अपने माँ – बाप के इन्तेकाल के बाद उन का कर्ज अदा करता है और न मानी हुई मन्नत को पूरी करता है, वह अग्रेजी जीवन में भी उनका फर्माबरदार रहा हो, फिर भी अल्लाह के नजदीक उनका नाफरमान समझा जाएगा| (अल अद्बुल मुफरद)

आप सल्ललाहु अलैहे व सल्ल्म ने फरमाया के वह शख्स जलील हो, वह शक्स जलील हो, वह शक्स जलील हो| लोगो ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! वह शक्स कौन है? अपने फरमाया : वह शक्स जिसने अपने माँ – बाप को बुढ़ापे की हालत में पाया, दोनों को पाया या दोनों में से एक को पाया और फिर भी ( उनके घिदमत करके ) जन्नत में दाखिल न हुआ| (इस्लाम)

आप सल्ललाहु अलैहे व सल्ल्म ने फरमाया : तुम्हारा माल और तुम अपने माँ – बाप के लिए हो| तुम्हारा पाक कमाई है इसलिए तुम अपने औलाद की कमाई से बिला जिजीक खाओ| ( इब्ने माजा )

माँ बाप के हुक़ूक़

आप सल्ललाहु अलैहे व सल्ल्म ने फरमाया की : जो नेक औलाद भी अपने माँ – बाप पर मुह्बात भरी एक नजर डालती हो उसकी बदले में अल्लाह उसको एक मकबूल हज का सवाब बखास्ता है| सहाबा ने पूछा : ए अल्लाह के रसोल! अगर कोई एक दिन में सो बार मुह्बात और रहमत की नजर डाले तो? आप ने फरमारया : अगर कोई सो बार मुह्बात की नजर डाले तब भी| अल्लाह ( तुम्हरा ख्याल से ) बहुत बड़ा और ( तंगदिली जैसे ओह्बे से ) बिल्कुल पाक है| (मुस्लिम)

मालूम रहे की माँ – बाप का हक़ बहुत ही बड़ा है| यहाँ तक की अगर उनसे औलाद के हक़ में कोई अनियाहे भी हो जाए तब भी हुनकी इजाजत से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए| क्युकी अल्लाह की रजामंदी और नाराजगी माँ – बाप की खुसी और नाराजगी पर ही निर्भर है| माँ – बाप की सेवा का यह हक़ समझना चाहिए, की उनके इन्तेकाल के बाद मिलने वालो और उनके मित्रो का आदर – सम्मान करें और उनके साथ अच्छा बर्ताव और अहसान से पेस आये|

माँ – बाप की इजाजत से सिर्फ एक सूरत में बचने की गुजारिस है, और वह यह की माँ – बाप अगर किसी ऐसे काम को करने के लिए मजबूर करे जो अल्लाह और उसकी रसूल सल्ललाहु अलैहि व सल्लम के हुकम के खिलाफ हो, तो ऐसे मोके पर बड़ी खूबसूरत के साथ उसको मानने से अपने मजबूरी का इजहार कर दे|

आप सल्लालु अलैहि व वस्लम ने फरमाया की जो शक्स ने अपने माँ – बाप की बात मानी या कहना नहीं उसने अपना रिज्क घो दिया और ऐसे शक्स की कभी भी मगफिरत नहीं होगी लकिन अगर वो अपनी माँ – बाप का कहने व सुनने पर अमल करगे तो उसका मगफिरत हो जाएगे साथ ही साथ इस्लाम पर भी धियान देना होगा और उसके माँ – बाप पर भी धियान होना चाहिए|

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