Janaza ko ghusl dene ka tarika in hindi (2021)

Janaza Ko Ghusl Dene Ka Tariak
janaza ko ghusl kaise karwayen

Janaze Ko Ghusl Dene Ka Tariak – मय्यत को नहलाने का मुकम्मल तरीका हिंदी में

Janaza ko ghusl kaise de जनाज़े को नहलाने का तरीका मय्यत को ग़ुस्ल देने का मुकम्मल तरीका हिंदी में

जनाज़े (janaza) का जब कफ़न दफ़न का सारा सामान आजाए और जब जनाज़े janaza को नहलाने की पूरी तैयारी हो जाए तो सबसे पहले मय्यत को ग़ुस्ल देने के लिए एक तख़्त बिछा दें जहाँ पर जनाज़े को ग़ुस्ल देना है

जनाज़े janaza को तख़्त पर लिटाने में ऐसा कोई मशला नहीं है की मय्यत का सर या पैर क़िब्ला या फिर किसी और तरफ होना चाहिए जिधर से आपको ज्यादा सहूलत हो नहलाने में उधर तख़्त पर लिटा दें |

सबसे पहले मुर्दे ने जो कपडे पहन रखें है उसे उतार दे और कोई कपडा मय्यत के ऊपर डाल दें जो मय्यत के नाफ से लेकर जानू तक होनी चहिए कपडा इतना लम्बा होना चाहिए की मय्यत का जिस्म छिप जाए

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अगर मय्यत को नहलाने का अलग अलग इंतेज़ाम है जहाँ पानी कहीं अलग बाह जाए तो बहुत दुरुस्त है और अगर नहलाने की जगह तंग है तो तख़्त के निचे गड्ढा कर लें ताकि ग़ुस्ल दिया हुआ पानी इधर उधर ना बहे फैले अगर फ़ैल गया तो इसमें कोई गुनाह नहीं है बस कहने का मतलब ये है की लोगो को आने जाने में परिशानी ना हो |

जनाज़े को नहलाने का तरीका – (janaza) ko kaise ghusl dein

जनाज़े janaza को ऐसा शख्स ग़ुस्ल दे जो मुत्तक़ी और परहेजगार हो और अगर घर का कोई ऐसा आदमी हो जो ग़ुस्ल दे सके ये और बेहतर है वो इस लिए की अगर मय्यत में कोई ऐब वगैरह देखे तो वो उसे छुपा ले

मय्यत को ग़ुस्ल देने का तरीका ये है की सबसे पहले जनाज़े janaza की गलाजत यानि गन्दगी को साफ़ करें और साफ़ करने का तरीका ये है की अपने हांथो में कपडे का दस्ताना या फिर कोई साफ़ कपडा लपेट लें फिर मय्यत के शर्मगाह के जगह पर हाँथ लगा कर अच्छे से धुलें

याद रहे जो कपडा जनाज़े janaza के ऊपर ढका हुआ है उसके अंदर से हाँथ डाल कर साफ़ करना है ना तो आप कपडे को हटाएँ और नाही उस पर निगाह डालें

मय्यत को वज़ू कैसे करवाएं

सबसे पहले जनाज़े janaza के मुंह को धुलें उसके बाद हाँथ को कुहनी तक धुलें फिर सर का मसह करें फिर दोनों पैर धुलें उसके बाद रुई तर कर के दांतों और मसूड़ों और नाक के दोनों सुराखों में फेर दें |

मगर जनाज़े janaza के वजु में गट्ठों तक पहले हाथ धोना और कुल्ली करना और नाक में पानी डालना नहीं है

अगर मुर्दा हैज़ या निफ़ास के दरमियान मर जाए तो इस तरह मुंह और नाक में पानी पहुंचाना जरुरी है खास ख्याल मय्यत के नाक मुंह और कान में रुई डाल दें ताकि वज़ू या ग़ुस्ल का पानी मुर्दे के अंदर न जाने पाए

जब जनाज़े (janaza) की वज़ू मुकम्मल हो जाए तो सर को गले खैरु से या किसी और चीज से जिससे साफ़ हो जाए जैसे बेशन या खली से अच्छे से मलकर धोएं जो अच्छे से साफ़ हो जाए

फिर मुर्दे को बायीं करवट पर लिटा कर बेर के पत्ते डाल कर पकाय हुवे हलके गरम पानी को तीन बार सर से पैर तक डालें इस तरह पानी डालें की बायीं जानिब तक पहुँच जाए|

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फिर मुर्दे को दाएं जानिब के तरफ लिटा दें और फिर ठीक इसी तरह सर से पैर तक तीन बार इतना पानी डालें की दाहिने करवट तक पहुँच जाए

अब मुर्दे को अपने बदन के टेप पर थोड़ा बिठा दो और हलके हांथों से मुर्दे के पेट को मलें अगर मलते वक़्त मुर्दे के शर्मगाह से पाखाना या गन्दगी निकल जाए तो उसे कपडे से पोंछ कर उसे अच्छे से धूल दें

मय्यत को इत्र लगाना कैसा है
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जब मुर्दे को कफ़न पर रखो तो सर पर इत्र लगा दो अगर मय्यत मर्द का है तो उसके दाढ़ी पर भी इत्र लगा दें फिर माथा और नाक और दोनों हथेली और दोनों घुटनो और दोनों पाओं पर काफूर मल दो

जरुरी बातें कुछ लोग कफ़न में इत्र लगाते है और इत्र की फुरेरी कान में रख देते है ये सब जिहालत है जितना सरियत में आया है उससे ज्यादा मत करो

कुछ ख़ास मशलें – ध्यान देने वाली बातें

कुछ ख़ास मसलें मुर्दे के बालों में कंघी वगैरह न करें मुर्दे के नाख़ून और बाल भी न काटें जिस तरह है उसी तरह रहने दें

अगर कोई मर्द का इंतेक़ाल हो गया है और मर्दों में कोई नहलाने वाला नहीं है तो उसके बीवी के अलावा और किसी औरत को ग़ुस्ल देना जायज नहीं है चाहे मरहम ही क्यू न हो हाँ अगर उसकी बीवी ग़ुस्ल दे तो दुरुस्त है

अगर बीवी भी न हो तो मुर्दे को सिर्फ तयम्मुम करा दें लेकिन मुर्दे के बदन में हाँथ न लगाए बल्कि अपने हांथो में पहले दस्ताने पहन ले उसके बाद तयम्मुम कराएं

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किसी का खाविंद का इंतेक़ाल हो गया तो उसकी बीवी को उसका नहलाना और कफनाना दुरुस्त है और अगर बीवी मर जाए तो खाविंद का बदन छूना और हाँथ लगाना दुरुस्त नहीं है हाँ देख सकता है और कपडे के ऊपर से हाँथ भी लगा सकता है ये दुरुस्त है|

जो औरत हैज़ या निफ़ास से हों वो मुर्दे को न नहलाएं ये मकरूह और मना है बेहतर ये है की उसका जिससे रिश्ता ज्यादा करीब रहा हो वो नहलाएं अगर वो न नहला सके तो कोई दीनदार नेक औरत नहलाय

अगर मय्यत को ग़ुस्ल देने में ऐब दिखे तो क्या करें

अगर मय्यत को नहलाते वक़्त उसमे कोई ऐब दिखे तो किसी से उसका जिक्र न करें अगर खुदा न खास्ता मरने से उसका चेहरा बिगड़ गया हो या फिर काला पड़ गया हो तो इसका भी जिक्र किसी से न कहे ये नाजायज है |

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हाँ अगर वो खुल्लम खुल्ला दुनिया में गुनाह करती थी जैसे नाच ती थी या फिर गाने बजाने जैसा पेसा क्या करती थी या फिर वो वैश्या थी तो उसके ऐबों के बारे में लोगों को बता देने दुरुस्त है ताकि ऐसे गुनाहों से तौबा करें |

जनाज़े को ग़ुस्ल देते video इन प्रेक्टिकल

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