Astaghfar ka tarika – तौबा अस्तग़फ़ार करने की फ़ज़ीलत

Astaghfar

Astaghfar ke fazail -11 परिशानियों से निजात हिंदी में 

अस्सलामो अलैकुम नाजरीन Astaghfar किसी कहते है जब किसी इंसान से गलती हो जाता है और उसे एहसास होता है की मुझसे गलती या गुन्नाह हो गया है फिर जब वो अल्लाह तआला से उस गुनाह का तौबा या मुआफी मांगता है तो उसे astaghfar कहते है |

अल्लाह ताअला इंसान का खालिक व मालिक है और अल्लाह ता अला की जात इस बात के लाइक है के बंदा हर वक्त उस के सामने सजदा रिज रहे लेकिन जो की इंसान में गलती और भूल चूक का मदह है

इस लिए कभी न कभी चूक हो जाती है इस चूक पर अल्लाह ता आला अगर बन्दे को सिर्फ माफ़ कर दे तो यही अल्लाह ता आला का बहुत बड़ा अहसान है लेकिन कुर्बान जाएँ उस महरबान अल्लाह की जात पर के जब बंदह कोई गुनाह कर बैठता है

और उस के बाद अल्लाह ता आला से तौबा व इस्तगफार (astaghfar) करता है तो वह सिर्फ माफ़ ही नहीं करता बल्के माफ़ी के साथ बहुत से फ़ज़ाएल व इनआमात से नवाजता है जिन का जिक्र हमें क़ुरान व हदीश में मिलता है इन में से 11 अहम् फजाइल व इनआमात यहाँ जिक्र किये गएँ हैं|

पहली फ़ज़ीलत अल्लाह तआला सारे गुनाह मुआफ कर देंगे 

हदीस क़ुद्सी है

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

يَآبنَ آدَمَ لَوبَلَغَتْ ذُنُوبُكَ عَنَانَ السَّمَاءِ
 شُمَّ استغفَرتَنِى غَفَرتُ لَكَ وَلَا أُبَالَى

اتىر مذى(3463))

translation:– ए इब्ने आदम अगर तुम्हारे गुनाह आसमान तक पहुँच जाए फिर तो मुझसे मगफिरत तलब करे तो मै तेरी मगफिरत कर दूंगा मुझे कोई परवाह भी नहीं होगी |

दूसरी फ़ज़ीलत अस्तगफार जन्नत में दाखिला नसीब होगा

अल्लाह बारीक व तआला फरमाते है

अल्लाह तआला फरमाते है

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

يَجْعَل لَّكُمْ جَنَّاتٍ وَّيَجْعَل لَّكُمْ اَنْهَارً

(12نوح)

Translation:- असतगफ़ार (Astaghfar) करने से पर अल्लाह तआला जन्नत में तुम्हारे लिए बाग़ात पैदा करेगा और तुम्हारे खातिर नहरे मुहैया करेगा |

तीसरी फ़ज़ीलत रहमतों वाली बारिशें बरसेंगी

फरमान ए इलाही है

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُمْ مِدْ

نوح:12 هود 52

translation:- अस्तग़फ़ार करने पर वो तुम पर आसमान से खूब रहमतों का बारिश बरसाएगा 

चौथी फ़ज़ीलत माल व दौलत में बरकत होगी

इरशाद ए बारी तआला है

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

يُمْدِدْ كُمْ بِاَمْوَالٍ

(12نوح)

translation:- अस्तग़फ़ार करने से वो तुम्हारे माल में इज़ाफ़ा फरमाएगा

फरमान ए खाती मूल अम्बिया s.a.w है

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

رَزَقَهُ مِنْ حَيْثُ لَايَحْتَسِبْ

مستدركللحاكمر:(7758))

Translation:- बा कशरत अस्तग़फ़ार (astaghfar) करने वाले को अल्लाह ऐसी जगह से रोज़ी देगा जहाँ से गुमान भी नहीं होगा

पांचवी फ़ज़ीलत नरीना औलाद अता होगी

अल्लाह तआला ने सूरह नूह की आयत नम्बर 12 में अस्तग़फ़ार के अनामात का जिक्र करते हुवे फ़रमाया (بَنِيُن) यानी जो शख्स अस्तग़फ़ार करेगा अल्लाह तआला उसे औलाद ए नरीना की नेमत से नवाजे गए

छठी फ़ज़ीलत जिस्मानी कूवत हासिल होगी

अल्लाह तआला ने फ़रमाया

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

يَزِدْكُمْ قُوَّةً اِلىٰ قُوَّتِكُمْ

هود(12)

Translation:- अस्तग़फ़ार करने पर अल्लाह तआला तुम्हारा मौजूदा कूवत में मजीद कूवत का इजाफा फरमाएगा 

सातवीं फ़ज़ीलत बस्ती पर आने वाली अज़ाबात टल जायगी

फरमान ए बारी इलाही

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

مَا كَانَ الله مُعَذِّ بَهُم وَهُمْ يَسْتَغْفِرُون

الانفال:33

Translation:- अल्लाह तआला उन लोगों को अज़ाब देने वाला नहीं है जो अस्तग़फ़ार करते रहते हों यानी तुम्हारे अस्तग़फ़ार की की बरकत से तुम्हारे समेत साड़ी बस्ती वालों पर से अज़ाबात टल जाएंगे 

आठवीं फ़ज़ीलत हर गम से निजात मिल जायगी

आखिरी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

مَنْ اَكْثَرَ مِنَ اْلِا سْتِغْفَارِ جَعَلَ الله لَهٗ مِنْ كُلِّ هَمٍّ فَرَجًا

مستدركلالح كمر:7758

Translation:- जो शख्स कशरत से अस्तग़फ़ार astaghfar करता रहेगा अल्लाह तआला उसको हर गम से निजात देंगे

नवीं फ़ज़ीलत हर मुश्किल व परिशानी से छुटकारा मिल जायेगा

आखिरी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

مِنْ كُلِّ ضَيْقٍ مَخْرَجًا

مستدركلالح كمر:7758

Translation:- जो शख्स कशरत से अस्तग़फ़ार astaghfar करता रहेगा अल्लाह तआला उसको हर मुश्किल से निजात देंगे

दसवीं फ़ज़ीलत आपकी हर जाएज़ दुआएं क़ुबूल होगी

ग्यारवी फ़ज़ीलत आपको और बस्ती वालों को रिज़्क़ अता होगा

आखिरी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया

(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)

من اسْتَغْفَرَ لِلْمُؤ مِنِيْنَ وَ الْمُؤ مِنَتِ كُلَّ يَوْمٍ
سَبْعَاوَّ عِشْرِيْنَ مَرَّةً اَوْ خَمْسًا وَّ عِشْرِيْنَ مَرَّةً
اَحَدُالْعَدَدَيْنِ كَانَ مِنَ الَّذِيْنَ يُسْتَجَابُ لَهُمْ
وَيُرْزَقُ بِهِمْ اَهْلُ الْاَرْضِ

مَجمَع الزَّواهىد:17600

translation:- आठवीं फ़ज़ीलत हर गम से निजात मिल जायगी
जो शख्स हर दिन अल्लाह तआला से मोमिन और मोमेनात के लिए 27 या 25 मर्तबा अस्तग़फ़ार करता है अल्लाह तआला उसको उन लोगों में सुमार फरमाते है जिन की दुआएं क़ुबूल होती है और जिनके तुफैल जमीन वालों को रिज़्क़ दिया जाता है

इस इनफार्मेशन को शदका जारिया समझते हुवे आगे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें (दुआ में याद रखना)

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