khutba e juma | जुमा के ख़ुत्बे में कौन कौन सी 12 सुन्नतें है

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khutba

( khutba ) जुमा के ख़ुत्बे में 12 सुन्नतें कौन कौन सी है |

अस्सलामो अलैकुम नाजरीन आप ( khutba ) के बारे तो जानते ही होंगे juma khutba के कितने importence है इस्लाम में इसलिए आज के पोस्ट में हम खुत्बा (khutba) पर रौशनी डालेंगे और उन बारह सुन्नतों के बारे में जानेगे

जब लोग जमात में आ जाये तो इमाम को चाहिए की मिम्बर पर बैठ जाए और मुअज्जिन उनके सामने खड़े हो कर अजान कहे

अजान ख़तम होने के बाद फ़ौरन इमाम शाहब खड़े हो जाएं और खुत्बा ( khutba ) पढ़ना शुरू कर दे

importance of 12 sunnatein in khutba

  1. खुत्बा khutba पढ़ते वक़्त खुत्बा पढ़ने वाले को खड़ा रहना
  2. खुत्बा पढ़ना
  3. दोनों ख़ुत्बे के बिच इतनी देर तक बैठना की जब तक सुब्हानल्लाह कह सके
  4. दोनों हादसों (ना-पकियों) से पाक होना
  5. इमाम शाहब में मुंह लोगो की तरफ रखना
  6. अपने दिल में आऊजु बिल्लाहि पढ़ना खुत्बा सुरु करने से पहले
  7. इतना बुलंद आवाज़ से खुत्बा पढ़ना की लोगो को अच्छे से सुनाई पड़ सकें
  8. ख़ुत्बे में इन आठ किस्म के मजमूनो का होना | जैसे

जुमा का खुत्बा में इन आठ किस्म के मजमूनो का होना जैसे (1) अल्लाह का शुक्र और उसका तारीफ़ करना (2) खुदा का एक होने और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलाम की रिसालत की गवाही देना

(3) नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलाम पर दरूद पढ़ना (4) वाज व नसीहत (5) क़ुरान शरीफ की आयतों का या किसी सुरह का पढ़ना (6) दूसरे ख़ुत्बे  में फिर इन सब को दोहराना (7) दूसरे ख़ुत्बे ( khutba ) में बजाये वाज व नसीहत (8) मुसलमानो के लिए दुआ करना

आगे बचे हुवे सुन्नतों का जिक्र

9. ख़ुत्बे को ज्यादा लम्बा न करना बल्कि नमाज़ से कम रखना

10. जुमा का खुत्बा हमेसा मिम्बर पर पढ़ना अगर मिम्बर न होतो किसी लाठी वगैरह के सहारे देकर खड़ा होकर खुत्बा पढ़ना

11. दोनों जुमा का खुत्बा का अरबी जुबान में होना और किसी जुबान में खुत्बा पढ़ना या उसके साथ किसी और जुबान के शेर वगैरह मिला देना जैसा की अभी के वक़्त में लोगों का तरीका है ये सुन्नतें मुअककदा है और मकरूहे तहरीमी है इम्दादुल फतावा जिल्द (no page no 25)

12. खुत्बा सुनने वालों का क़िबला रुख होकर बैठना दूसरे ख़ुत्बे में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलाम के आल व असहाब और बीवियों खास तौर से सुरु के चारों ख़लीफ़ों और हजरत हमजा व अब्बास रजि० के लिए दुआ करना मुस्तहब है इस्लामी बादशाह के लिए दवा करना जायज है मगर उसकी ऐसी तारीफ़ करना गलत हो मकरूहे तहरीमी है |

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 खुत्बा सुरु हो जाने पर नमाज़ पढ़ना कैसा है

जब इमाम खुत्बा पढना सुरु कर दे तो नमाज़ पढ़ना कैसा है
जब इमाम शाहब ख़ुत्बे के लिए खड़े हो जाए तो उस वक़्त से कोई भी नमाज़ या एक दूसरे से बात करना मकरूहे तहरीमी है

हाँ क़ज़ा नमाज़ पढ़ना तर्तीब वालों के लिए उस वक़्त भी जायज है बल्कि वाजिब है फिर जब तक इमाम खुत्बा ( khutba ) ख़तम न कर दें ये सब चींजें मन है |

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जब इमाम शाहब खुत्बा सुरु कर दें तो वहां मौजूद लोगों को खुत्बा सुन्ना वाजिब है फिर चाहे वो इमाम के नजदीक बैठा हो या दूर और कोई ऐसा काम करना जो खुत्बा सुनने में रुकावट बन रहा है

वो मकरूहे तहरीमी है और खाना पीना बात चित करना सलाम का जवाब देना या तस्बीह पढ़ना या किसी को शरयि मसला बताना जैसा की नमाज़ के हालत में मन है उसी तरह यहाँ भी सख्त मना है |

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