ayat e karima hindi mein | ayat e kareem hindi & arbic

नाजरीन अस्सलामो अलैकुम सबसे पहले हम आपका इस हिन्दी इस्लामिक वेबसाइट {Duanamaz.com} में इस्तकबाल करते हैं । और अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि आपका आज का ये दिन और आने वाला हरेक दिन खुशहाली और कामयाबी से भरा हो । (आमीन)

ayat e karima hindi english & arabic

in hindi

ला इला-ह इल्ला अन्त सुब्हानक इन्नी कुन्तु मिनज़्ज़ालिमीन”

in arabic

لَّآ إِلَٰهَ إِلَّآ أَنتَ سُبْحَٰنَكَ إِنِّى كُنتُ مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ

in english

laa ilaha illa anta subhanaka inni kuntu minazzalemeen”

ayat e karima

 

आयत ए करीमा की फ़ज़ीलत 

आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे आयत ए करीम ayat e karima और इस आयत के फ़ज़ीलतों के बारे में नाज़रीन आप पर या आपके घरों में कोई मुशीबत या परिशानी आ गयी हो तो आयत ए करीम ayat e karima पढ़ लिया करें अल्लाह ने चाहा तो आपको उस परिशानी से बहुत जल्दी निजात मिल जायेगा।

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इतना ही नहीं नाज़रीन इस आयत ए करीमा (ayat e karima) को पढ़ने की और भी बहुत सारे फायदे है जिसके चन्द फायदे को हम यहाँ आज ब्यान कर रहे है।

  1. इस आयत यानी आयत ए करीमा (ayat e karima) को रेगुलर पढ़ते रहने से रिज़्क़ में इज़ाफ़ा यानी बरकत होती है |
  2. आयत ए करीमा के विरद से आपके सभी मुसकाळात के हल निकल आएगा।
  3. इस आयत यानी आयत ए करीमा को पढ़ने से अमली और जेहनी दोनों में सुकिनिया महसूस होगा
  4. अच्छे जॉब करने के लिए इस आयत यानी आयत ए करीमा ayat kareema का हमेशा विरद करना चाहिए |

हजरत यूनुस अलैहि अस्सलाम की दुआ है ये दुआ उस वक़्त बारगाहे रिसालत में की जिस वक़्त आप को दरिया में एक बहुत बड़ी मछली ने निगल लिया आप चालीस योम तक मछली के पेट में रहे

और वही से यानी के मछली के पेट के अंदर से ही आप ने ये दुआ मांगी तो उस दुआ की बरकत से परवरदिगार आलम ने मछली के पेट से सही सलामत हालत में बहार निकाला और आपको गमो फिक्र से निजात फरमाएं

laa ilaha illa anta subhanaka के मानी क्या है| 

आयत ए करीमा के हिस्सा यानि मानी ये है परवरदिगार आलम अपनी अवहियत के अदसाफ में यकता है हर एक पर अल्लाह तआला का इल्म अहाता किये हुवे है हर एक बात में अल्लाह तआला की कुदरत व हिकमत शामिल है उसकी रहमत बे हिसाब है और उसका कोई भी काम हिकमत से खाली नहीं है

अल्लाह तआला की अहदो यकता होने में ये बात भी शामिल है की वो मुसलसल अपने बन्दों पर एहसानात करता है अपना फज्लो करम नाजिल फरमाता है पर्दिगार आलम के ilaha वही और सिर्फ वही इबादत के लायक है अपने बन्दों के लिए बहुत ही ज्यादा महबूब है और उसके बन्दों के दिलों में उसकी बे पनाह अजमत है |

बिमारी में सफा के लिए आयत ए करीमा पढ़ें

हर तरह की बेमारी से निजात हासिल करने के लिए और सफा याबी के लिए इस आयत यानि आयत ए करीमा को पढ़ना निहायत फायदे मंद है इस आयत आयत करीमा ayat kareema को रोजाना फज्र नमाज़ के बाद

बा वज़ू हालत में इक्कीस आयत करीमा (ayat e karima) को पढ़ कर पानी पर दम कर के उस मरीज़ को पीला दे तो इंशा अल्लाह बहुत जल्द उस मरीज में इफ़ाक़ा होगा चन्द योम के अमल से बफज्ज़ल बारी तआला शफा हासिल होगा।

हर किसम के मर्ज़ के लिए ये आयत करीमा पढ़ना इन्तेहाई नाफह है हजरत साद बिन मलिक रजि अल्लाहु तआला अन्हा फरमाते है के हजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आयत करीमा के बारे में इरशाद फ़रमाया है

के जो मोमिन इस आयत को अपनी बीमारी की हालत में चालीस मर्तबा पढ़े और अगर बिमारी की हालत में ही वो शख्स मर जाए तो उसको सहीद का अजर मिलता है और अगर तंदुरुस्त हो जाए तो उसके तमाम गुनाहो को बख्स दिए जाते है (हाकिम)

हलाल रिज़्क़ के लिए हजार मर्तबा आयत करीमा पढ़ें

जो कोई शख्स ये चाहता है की उसके रिज़्क़ में बे इन्तहा खैरो बरकत हो रिज़्क़ हलाल की फ़रमानी व वुस्वत हो कभी रिज़्क़ की कमी व तंगी न आये तो उसे चाहिए की वो हर रोज़ किसी भी वक़्त मायना पर बा वज़ू हालत में एक हजार मर्तबा आयत इ करीमा ayat karima को पढ़ने का मामूल बना ले

इंशा अल्लाह तआला उसके रिज़्क़ में कभी तंगी न होगी परवर दिगार आलम इस आयत करीमा के तुफैल से हलाल रिज़्क़ में खैरो बरकत अता फरमाएगा और कभी भी रिज़्क़ में कमी ना होगी।

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